Ladai, jhagde, manmutav bhi hai jaruri | jindagi me kuch naya sikhne ke liye |

*Jindagi me manmutav ladai jhagde bhi hai JARURI*

jab SHIKSHA ke dauran SHIKSHAK ji kuch SAMAJHANE ke liye
KUCH UDAHRANO (EXAMPLE) KA PRAYOG KARTE hai

to kuch UDAHRAN
jindagi ko
badal dene wali
parerana Dete hai

jab ITIHAS Ki padai ke
dauran hamare SHIKSHAK
SHREE MAN BHAWAR LAL JI NE UDAHRAN ME JO
HUME SAMAJHANE
KE LIYE KAHA

USEE AAP LOGO KO BATANA BHI JARURI
THAA
.
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TO USKE ADHAR PAR PADE
YE POST

jab hum apne aaspass me
rishtedari sanjhedari
ka mahol banaye rakhte hai
to hum kuch NAYA nahi
Sikh SAKTE

“AUR DUNIYADARI KE KADE NIYAMO KO TO BULKUL BHI NAHI SAMAJH SAKTE"

Kyu ki jab hume humari HAR
bato me KEWAL taliya hi Milegi to wo waqt dur NAHI hoga
jab hum un taliyo
ke chakkar me Bina apni
galtiyo ko sudhare ek kade kadam par chal padenge
aur waha se HAAR kar lautenge

Kyu ki jab humare aaspass ke log sare sanjhedari wale hi hai

to bhala Kon
apne sanjhedar ya
rishtedar
ko bura ya galat
batayga
wo nahi chahenge
Ki humari bat se
humare hi rishtedaro
ko taklif ho ya use
bura lage
to es TARAH aap ko apni galtiyo ke bare me pata chalna to dur
apko uske bare me
bhanak bhi nahi lag pati

TO aisi STITHI ME HAMARA MANMUTAV HI HAMARE KAAM ME AATA HAI

jab KISI se apna
LADAI JHAGDA YA
MANMUTAV ho jata
HAI
TO gusse me hi Sahi
par wo humari
HAR KAMIYO
AUR AVGUNO SE
HUME PARICHIT KARA
DETA HAI
GUSSE ME WO GALI KE jagah par HAMARE AVGUNO, BURE KAAMO, YA KAMIYO KI BATO ka PRAHAR HI HUM PAR KARTA HAI
JINME SE KAI BATO KE BARE ME TO HUME PATA TAK NAHI HOTA

JISKE SAHARE
SE HUME HUMARE
AVGUNO aur DOSHO KA PATA CHAL JATA
HAI
AUR HUM
USME SUDHAR KAR
SAKTE HAI

*YE BAAT SHAYAD AAPKE SATH PAHLE BHI HUI HOGI*

  “JAB AAPKI KISI SE LADAI HUI AUR AAPKO APNE
DOSHO,AVGUNO KE BARE ME PATA CHALA HO”

KYUKI
  “VIRODHI HAMESHA BOLNE KA MAUKA DUNDHTE HAI AUR APKI BURAIYO KAMJORIYO
AUR MAJBURIYO PAR PRAHAR KARTE HAI”

TO AGLI BAAR LADAI JHAGDO KE DUKHO PAR
DHYAN NA DE

DHYAN USPAR DE
KI APNE LADAI JHAGDO
SE KYA SIKHA

BHAGWAN NE SABHI CHIJO KO KISI NA KISI KARYA KE LIYE BANAYA HAI
ISHWAR DWARA BANAYI KOI BHI VASTU VYARTH(USELESS) NAHI HOTI
CHAYE WO APKA KRODH HO
YA APKA RONA
JIVAN ME SAB CHIJO KA MAHATVA UTNA HI HOTA HAI
JITNA KI APKA JINA

AGAR POST ACHI LAGI TO PLEASE SHARE KARNA

(PLEASE DON'T USE
COPY AND PAST)

भारत कि मुश्किल स्थिति में एक मुस्लिम भारतीय का राष्ट्रीय रक्षा कोष में सबसे बड़ा दान।



नीजाम मीर उसमान हैदराबाद
रियासत के अंतिम निज़ाम थे।
जिनका:
जन्म-6 अप्रैल 1886
मृत्यु-24 फ़रवरी 1967
****
1911 से 1948 तक वे इस रियासत के निज़ाम (शासक) रहे और उसके पश्चात 1956 तक उसके संवैधानिक प्रमुख भी रहे।
वे एक समय में विश्व के
सबसे धनी व्यक्तियों में
से एक थे।

पाकिस्तान से 1965 का
युद्ध जीतने के बाद देश
की आर्थिक स्थिति कुछ
सही नहीं थी ।

जब सम्भावित युद्धों की स्थिति
से निपटने के लिए धन की आवश्यकता पड़ी तो इसके
लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री
श्री लाल बहादुर शास्त्री ने
राष्ट्रीय रक्षा कोष की स्थापना की।

स्थापना करने के साथ ही उन्होंने
लोगों से इसमें दान देने की अपील भी की.
शास्त्री जी ने तमाम राजाओं और
सूबेदारो तक यह बात पहोचाई।
।।
शास्त्री जी ने जब नीजाम मीर उसमान से भी इस संबंध में बात की तो नीजाम मीर उसमान ने अपना भारतीय धर्म निभाते हुए बीना किसी संकोच के↓↓

5 टन सोना देने की घोषणा की।

और आज अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार
में पाँच टन सोने की कीमत
तकरीबन 1,620 करोड़ रूपए
आँकी गई है.

ये राष्ट्रीय रक्षा कोष का
सबसे बड़ा दान था।

उनका दान आज भी अमर है।
उस समय उनके द्वारा दी  इस
सहायता से देश को आर्थिक रूप
से सक्षम बनाने मे बेहद मदद
मिली।

                   *जय हिन्द*


एक कविता हम सब की प्यारी मां के नाम।

धरती पर भगवान है मां
इसी मां के नाम है
ये कविता।
~~~~~~~~~~~~~~~~~

लेती नहीं दवाई "माँ",
जोड़े पाई-पाई "माँ"।

दुःख थे पर्वत, राई "माँ",
हारी नहीं लड़ाई "माँ"।

इस दुनियां में सब मैले हैं,
किस दुनियां से आई "माँ"।

दुनिया के सब रिश्ते ठंडे,
गरमागर्म रजाई "माँ" ।

जब भी कोई रिश्ता उधड़े,
करती है तुरपाई "माँ" ।

बाबू जी तनख़ा लाये बस,
लेकिन बरक़त लाई "माँ"।

बाबूजी थे सख्त मगर ,
माखन और मलाई "माँ"।

बाबूजी के पाँव दबा कर
सब तीरथ हो आई "माँ"।

नाम सभी हैं गुड़ से मीठे,
मां जी, मैया, माई, "माँ" ।

सभी साड़ियाँ छीज गई थीं,
मगर नहीं कह पाई  "माँ" ।

घर में चूल्हे मत बाँटो रे,
देती रही दुहाई "माँ"।

बाबूजी बीमार पड़े जब,
साथ-साथ मुरझाई "माँ" ।

रोती है लेकिन छुप-छुप कर,
बड़े सब्र की जाई "माँ"।

लड़ते-लड़ते, सहते-सहते,
रह गई एक तिहाई "माँ" ।

बेटी रहे ससुराल में खुश,
सब ज़ेवर दे आई "माँ"।

"माँ" से घर, घर लगता है,
घर में घुली, समाई "माँ" ।

बेटे की कुर्सी है ऊँची,
पर उसकी ऊँचाई "माँ" ।

दर्द बड़ा हो या छोटा हो,
याद हमेशा आई "माँ"।

घर के शगुन सभी "माँ" से,
है घर की शहनाई "माँ"।

सभी पराये हो जाते हैं,
होती नहीं पराईll मां

Source: WhatsApp


हनुमान चालीसा का सम्पूर्ण अनुवाद हिन्दी में।

Hum Hanuman chalisa padhte hai par kai log eske bare me janna chahte Hai
Ki hum akhir es CHALISA ke
Jariye Hanuman ji se
Kya bol rahe hai

TO chaliye jante hai
HANUMAN CHALISA KI
har pakti(दोहे) ka ARTH.

श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुवर बिमल जसु, जो दायकु फल चारि।

《अर्थ》→ गुरु महाराज के चरण.कमलों की धूलि से अपने मन रुपी दर्पण को पवित्र करके श्री रघुवीर के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो चारों फल धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष को देने वाला हे।

•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरो पवन कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार।★
《अर्थ》→ हे पवन कुमार! मैं आपको सुमिरन.करता हूँ। आप तो जानते ही हैं, कि मेरा शरीर और बुद्धि निर्बल है। मुझे शारीरिक बल, सदबुद्धि एवं ज्ञान दीजिए और मेरे दुःखों व दोषों का नाश कर दीजिए।
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर, जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥1॥★
《अर्थ 》→ श्री हनुमान जी! आपकी जय हो। आपका ज्ञान और गुण अथाह है। हे कपीश्वर! आपकी जय हो! तीनों लोकों,स्वर्ग लोक, भूलोक और पाताल लोक में आपकी कीर्ति है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
राम दूत अतुलित बलधामा, अंजनी पुत्र पवन सुत नामा॥2॥★
《अर्थ》→ हे पवनसुत अंजनी नंदन! आपके समान दूसरा बलवान नही है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
महावीर विक्रम बजरंगी, कुमति निवार सुमति के संगी॥3॥★
《अर्थ》→ हे महावीर बजरंग बली! आप विशेष पराक्रम वाले है। आप खराब बुद्धि को दूर करते है, और अच्छी बुद्धि वालो के साथी, सहायक है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
कंचन बरन बिराज सुबेसा, कानन कुण्डल कुंचित केसा॥4॥★
《अर्थ》→ आप सुनहले रंग, सुन्दर वस्त्रों, कानों में कुण्डल और घुंघराले बालों से सुशोभित हैं।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
हाथ ब्रज और ध्वजा विराजे, काँधे मूँज जनेऊ साजै॥5॥★
《अर्थ》→ आपके हाथ मे बज्र और ध्वजा है और कन्धे पर मूंज के जनेऊ की शोभा है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग वंदन॥6॥★
《अर्थ 》→ हे शंकर के अवतार! हे केसरी नंदन! आपके पराक्रम और महान यश की संसार भर मे वन्दना होती है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
विद्यावान गुणी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर॥7॥★
《अर्थ 》→ आप प्रकान्ड विद्या निधान है, गुणवान और अत्यन्त कार्य कुशल होकर श्री राम काज करने के लिए आतुर रहते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया, राम लखन सीता मन बसिया॥8॥★
《अर्थ 》→ आप श्री राम चरित सुनने मे आनन्द रस लेते है। श्री राम, सीता और लखन आपके हृदय मे बसे रहते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा, बिकट रुप धरि लंक जरावा॥9॥★
《अर्थ》→ आपने अपना बहुत छोटा रुप धारण करके सीता जी को दिखलाया और भयंकर रूप करके.लंका को जलाया।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
भीम रुप धरि असुर संहारे, रामचन्द्र के काज संवारे॥10॥★
《अर्थ 》→ आपने विकराल रुप धारण करके.राक्षसों को मारा और श्री रामचन्द्र जी के उदेश्यों को सफल कराया।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
लाय सजीवन लखन जियाये, श्री रघुवीर हरषि उर लाये॥11॥★
《अर्थ 》→ आपने संजीवनी बुटी लाकर लक्ष्मणजी को जिलाया जिससे श्री रघुवीर ने हर्षित होकर आपको हृदय से लगा लिया।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
रघुपति कीन्हीं बहुत बड़ाई, तुम मम प्रिय भरत सम भाई॥12॥★
《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र ने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा की तुम मेरे भरत जैसे प्यारे भाई हो।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सहस बदन तुम्हरो जस गावैं, अस कहि श्री पति कंठ लगावैं॥13॥★
《अर्थ 》→ श्री राम ने आपको यह कहकर हृदय से.लगा लिया की तुम्हारा यश हजार मुख से सराहनीय है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा, नारद,सारद सहित अहीसा॥14॥★
《अर्थ》→श्री सनक, श्री सनातन, श्री सनन्दन, श्री सनत्कुमार आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी, सरस्वती जी, शेषनाग जी सब आपका गुण गान करते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते, कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥15॥★
《अर्थ 》→ यमराज,कुबेर आदि सब दिशाओं के रक्षक, कवि विद्वान, पंडित या कोई भी आपके यश का पूर्णतः वर्णन नहीं कर सकते।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
तुम उपकार सुग्रीवहि कीन्हा, राम मिलाय राजपद दीन्हा॥16॥★
《अर्थ 》→ आपनें सुग्रीव जी को श्रीराम से मिलाकर उपकार किया, जिसके कारण वे राजा बने।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना, लंकेस्वर भए सब जग जाना ॥17॥★
《अर्थ 》→ आपके उपदेश का विभिषण जी ने पालन किया जिससे वे लंका के राजा बने, इसको सब संसार जानता है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जुग सहस्त्र जोजन पर भानू, लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥18॥★
《अर्थ 》→ जो सूर्य इतने योजन दूरी पर है की उस पर पहुँचने के लिए हजार युग लगे। दो हजार योजन की दूरी पर स्थित सूर्य को आपने एक मीठा फल समझ कर निगल लिया।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहि, जलधि लांघि गये अचरज नाहीं॥19॥★
《अर्थ 》→ आपने श्री रामचन्द्र जी की अंगूठी मुँह मे रखकर समुद्र को लांघ लिया, इसमें कोई आश्चर्य नही है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
दुर्गम काज जगत के जेते, सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥20॥★
《अर्थ 》→ संसार मे जितने भी कठिन से कठिन  काम हो, वो आपकी कृपा से सहज हो जाते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
राम दुआरे तुम रखवारे, होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥21॥★
《अर्थ 》→ श्री रामचन्द्र जी के द्वार के आप.रखवाले है, जिसमे आपकी आज्ञा बिना किसी को प्रवेश नही मिलता अर्थात आपकी प्रसन्नता के बिना राम कृपा दुर्लभ है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सब सुख लहै तुम्हारी सरना, तुम रक्षक काहू.को डरना॥22॥★
《अर्थ 》→ जो भी आपकी शरण मे आते है, उस सभी को आन्नद प्राप्त होता है, और जब आप रक्षक. है, तो फिर किसी का डर नही रहता।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
आपन तेज सम्हारो आपै, तीनों लोक हाँक ते काँपै॥23॥★
《अर्थ. 》→ आपके सिवाय आपके वेग को कोई नही रोक सकता, आपकी गर्जना से तीनों लोक काँप जाते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
भूत पिशाच निकट नहिं आवै, महावीर जब नाम सुनावै॥24॥★
《अर्थ 》→ जहाँ महावीर हनुमान जी का नाम सुनाया जाता है, वहाँ भूत, पिशाच पास भी नही फटक सकते।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
नासै रोग हरै सब पीरा, जपत निरंतर हनुमत बीरा॥25॥★
《अर्थ 》→ वीर हनुमान जी! आपका निरंतर जप करने से सब रोग चले जाते है,और सब पीड़ा मिट जाती है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
संकट तें हनुमान छुड़ावै, मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥26॥★
《अर्थ 》→ हे हनुमान जी! विचार करने मे, कर्म करने मे और बोलने मे, जिनका ध्यान आपमे रहता है, उनको सब संकटो से आप छुड़ाते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
सब पर राम तपस्वी राजा, तिनके काज सकल तुम साजा॥ 27॥★
《अर्थ 》→ तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र जी सबसे श्रेष्ठ है, उनके सब कार्यो को आपने सहज मे कर दिया।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
और मनोरथ जो कोइ लावै, सोई अमित जीवन फल पावै॥28॥★
《अर्थ 》→ जिस पर आपकी कृपा हो, वह कोई भी अभिलाषा करे तो उसे ऐसा फल मिलता है जिसकी जीवन मे कोई सीमा नही होती।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा॥29॥★
《अर्थ 》→ चारो युगों सतयुग, त्रेता, द्वापर तथा कलियुग मे आपका यश फैला हुआ है, जगत मे आपकी कीर्ति सर्वत्र प्रकाशमान है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
साधु सन्त के तुम रखवारे, असुर निकंदन राम दुलारे॥30॥★
《अर्थ 》→ हे श्री राम के दुलारे ! आप.सज्जनों की रक्षा करते है और दुष्टों का नाश करते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता॥३१॥★
《अर्थ 》→ आपको माता श्री जानकी से ऐसा वरदान मिला हुआ है, जिससे आप किसी को भी आठों सिद्धियां और नौ निधियां दे सकते है।★
1.) अणिमा → जिससे साधक किसी को दिखाई नही पड़ता और कठिन से कठिन पदार्थ मे प्रवेश कर.जाता है।★
2.) महिमा → जिसमे योगी अपने को बहुत बड़ा बना देता है।★
3.) गरिमा → जिससे साधक अपने को चाहे जितना भारी बना लेता है।★
4.) लघिमा → जिससे जितना चाहे उतना हल्का बन जाता है।★
5.) प्राप्ति → जिससे इच्छित पदार्थ की प्राप्ति होती है।★
6.) प्राकाम्य → जिससे इच्छा करने पर वह पृथ्वी मे समा सकता है, आकाश मे उड़ सकता है।★
7.) ईशित्व → जिससे सब पर शासन का सामर्थय हो जाता है।★
8.)वशित्व → जिससे दूसरो को वश मे किया जाता है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
राम रसायन तुम्हरे पासा, सदा रहो रघुपति के दासा॥32॥★
《अर्थ 》→ आप निरंतर श्री रघुनाथ जी की शरण मे रहते है, जिससे आपके पास बुढ़ापा और असाध्य रोगों के नाश के लिए राम नाम औषधि है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
तुम्हरे भजन राम को पावै, जनम जनम के दुख बिसरावै॥33॥★
《अर्थ 》→ आपका भजन करने से श्री राम.जी प्राप्त होते है, और जन्म जन्मांतर के दुःख दूर होते है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
अन्त काल रघुबर पुर जाई, जहाँ जन्म हरि भक्त कहाई॥34॥★
《अर्थ 》→ अंत समय श्री रघुनाथ जी के धाम को जाते है और यदि फिर भी जन्म लेंगे तो भक्ति करेंगे और श्री राम भक्त कहलायेंगे।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
और देवता चित न धरई, हनुमत सेई सर्व सुख करई॥35॥★
《अर्थ 》→ हे हनुमान जी! आपकी सेवा करने से सब प्रकार के सुख मिलते है, फिर अन्य किसी देवता की आवश्यकता नही रहती।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
संकट कटै मिटै सब पीरा, जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥36॥★
《अर्थ 》→ हे वीर हनुमान जी! जो आपका सुमिरन करता रहता है, उसके सब संकट कट जाते है और सब पीड़ा मिट जाती है।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जय जय जय हनुमान गोसाईं, कृपा करहु गुरु देव की नाई॥37॥★
《अर्थ 》→ हे स्वामी हनुमान जी! आपकी जय हो, जय हो, जय हो! आप मुझपर कृपालु श्री गुरु जी के समान कृपा कीजिए।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जो सत बार पाठ कर कोई, छुटहि बँदि महा सुख होई॥38॥★
《अर्थ 》→ जो कोई इस हनुमान चालीसा का सौ बार पाठ करेगा वह सब बन्धनों से छुट जायेगा और उसे परमानन्द मिलेगा।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा, होय सिद्धि साखी गौरीसा॥39॥★
《अर्थ 》→ भगवान शंकर ने यह हनुमान चालीसा लिखवाया, इसलिए वे साक्षी है कि जो इसे पढ़ेगा उसे निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
तुलसीदास सदा हरि चेरा, कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥40॥★
《अर्थ 》→ हे नाथ हनुमान जी! तुलसीदास सदा ही श्री राम का दास है।इसलिए आप उसके हृदय मे निवास कीजिए।★
•••••••••••••••••••••••••••••••••••••••
पवन तनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित, हृदय बसहु सुर भूप॥★
《अर्थ 》→ हे संकट मोचन पवन कुमार! आप आनन्द मंगलो के स्वरुप है। हे देवराज! आप श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण सहित मेरे हृदय मे निवास कीजिए।★

SOURCE: WHATSAPP

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।धन्यवाद।


mujhe GARV HAI apne HINDUSTANI hone par |

« post puri PADE apko GARV hoga »

HINDUSTAN kewal ek DESH NAHI ye vo sthan hai jaha PRITHVIRAJ chowhan,Bhagat Singh , SHIVAJI, MAHARANA PRATAP jaise veer paida hue hai.
Jo najane kitno ke mahan aadarsh pareranawadi bane
hai.

es DESH ko jagat guru KAHA jata hai
KYUKI es mahan BHARAT me sikhne KO bohat Kuch hai .
yaha prachin mahan granth SE LEKAR KRANTIKARIYO,lekhko, kaviyo AUR  mahan logo ki
jewni aur atmakathaye
bharatwasiyo ke sath Kai logo   ke LIYE ek parerana wale strot hai


mujhe GARV HAI apne HINDUSTANI hone par

kyuki_

mere DESH ko jagat guru KAHA jata hai.

mere DESH me apni matrabhumi BHARAT ko MA ka darja Diya JATA hai.

yaha SABHI HINDU aur MUSLIM BHAI ek SATH bhaichare se RAHTE HAI.

ye wo Paawan DESH hai JISNE CHINA KO BUDHA DIYA AUR USNE HUMKO yudha Diya.

yaha MAHARANA PRATAP JI JAISE MAHARAJAO ne janm LIYA jinhone MARTE DUM tak apne HIND SWARAJ KE LIYE MUGLO se sangharsh kiya.

es jagah bhagat ji jaise krantikariyo ne janm LIYA Jo APNE aajad BHARAT ke LIYE apni jaan ka BALIDAN tak de gaye.

yahi HUA un RAM ji ka janm jinhone apne pita ke vachan ke karan 12 saal ka vanvas swikar kiya.

esi jagah hua mahtama Gandhi(Bapu) ka janm JINHE aaj afrika jaise desho me bhi mahapurush ke rup me jana
JATA hai.

esi jagah hua thaa un SHIVAJI MAHARAJ ka janm jinhone SAMPURN BHARAT ko aajad kiya mugal AURANGJEB ke KHOUF se.

yahi hua us yuva swami Vivekanand ka janm jinhone
APNI yuva jewan me hi kai videsho me APNI matrabhumi ka NAAM Roshan Kiya , jisne sabhi yuvao ko hamesh aage badte rahne ki Salah di
AUR unhe yakin dilaya ki vo hamesha unke sath hai.

yahi hua ek lohpurush (Ironman) sardar vallabh Bhai ka janm jisne sampurn Rajputana ko ek KAR Rajasthan banaya RAJYO KO MILAKAR BHARAT banaya.

yahi hua thaa us Buddh ka janm jisne aage chalkar  pure CHINA me paida Kiya ek Naya dharm yani ki sare budhist Hindu hai.

yahi hua matra,pitra BHAKT shrawan ka janm jisne apne netrahin ma bap ko karayi charodham ki Yatra kewal akele aur paidal.

yahi hua Rajputana veer pritviraj chowhan ka janm
JISNE 13 SE BHI jyada BAAR yudh me Mohammad gouri ko haraya AUR uske baar baar kshama mangne par use jewandan diya
par PRITHVIRAJ JI ke ek yudh harne par UNHE bandhi banaliya gaya aur
unki aakho me mohmmad gauri ke dwara sariya ghusane ke bad aanda karwa Diya gaya
par andhe KARNE ke bavjud
BHI PRITHVIRAJ ji ne gouri ko kewal apne ek teer SE MAR giraya

yahi hua rani LAKSHMI Bai ka lanm jinhone apne samrajya AUR JANTA ke LIYE kiya sari British hukumat par ghamasan hamla


  agar AUR UDAHRANO ki bato par gour KARE to likhte likhte jagah KAAM pad jayengi.
KYUKI BHARAT par julm KARNE wale kam par un julmiyo ka SATH dene wale gaddar jyada hua KARTE thai Akhir gaddar KAHA NAHI hote har jagah kahi Na kahi koi na koi gaddar nikal
hi JATA hai

aur BHARAT me sabhi krantikariyo ki sangya
Kuch fauladi parshuram ji, SHIVAJI, MAHARANA PRATAP aur bhagat singh jaisi hi hai

Kyuki
BHARAT me kami
krantikariyo ki NAHI
balki kami UNKE ubharne ki hai Kuch gumnam rah jate hai to Kuch gumnam hi rahna chahte hai

{SABHI KRANTIKARIYO KO DIL SE SALAM}

PAR ESI JAGAH (BHARAT me)

ESI JAGAH hua Mahabharat ka wo vinashkari yudha jisne sampurn prithvi (duniya) ko hila Diya jiske prabhav SE Hui Pure duniya ki arthvyavastha dadal gayi.

yahi hua un muglo ka uday AUR vikas (Babar ke bad) jinhone mara,kata un hinduo ko
jinhone nahi swikara Islam
jinhone NAHI chodi BHAGWAN ki Pooja

yahi hua us ashwathama ka janm jisne dronputra hokar BHI Kiya apne pita ke param shishya ARJUN ke aadhe pariwar ka khatma.

yahi hua us  brahman  RAWAN ka janm jisne vaivahit(shadishuda) hokar BHI Kiya pativrata SITA ji ka haran.

yahi hua MAMA kans ka janm jisne apni maut (kaal) ke Daar SE Kiya apni hi sagi Bahan dewki ke putro ka khatma.

   PAR EN SAB KE JANM AUR UDAY hona BHI JARURI THAA TAKI SABKO PATA CHAL JAYE KI ADHARM AUR JHUT KITNA BHI BADA TAKATWAR KYU NA HO PAR DHARM AUR SACCHAI KE AAGE USE HARNA HI PADTA HAI.
KYUKI ENME SE EK BHI AISA NAHI HAI jska ANT, khatma  NA HUA HO (par ek ashwathama hai Jo aaj BHI hajaro salo se jinda hai AUR apne karmo ka fal Aaj BHI jinda rahkar bhog RAHA hai)

      HINDU SANSKRITI KI YE
                    VANI
       SADEV AJAR AMAR HAI

KI.
             SATYA MEV JAYTE
                  “सत्य मेव जयते;
yani SACH ki hamesha jeet Hoti  hai

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DHANYAWAD.


mere BHARAT me koi bhi ASHIKSHIT nahi hai

shiksa se Matlab
kewal ek  ketabi
GYAN nahi

kai log SHIKSHA
ko kewal
kitab ka
GYAN bolte hai

lekin
HAR wo GYAN
ya HAR wo
KALA jise aap ne
Kisi bhi Karan sikha hai
wo bhi ek shiksa hi hai

aur aapne us se kitna
samjha ya sikha
ye aapke
shiksa ka samarthya hai

eske adhar par
aap khud
apna aanklan
kar sakte hai

kuch Na
pade likhe log
khudko ashikshit
bhi kahte
hai

par ashikshit ka
Matlab kewal anpad
hi nahi hota

Sahi mayno me
agar Mani gayi
bat kahu to
ASHIKSHIT
wahi hai

Jo Dimag se
shunya (0)
ho
  JISME chetna
jaisi bulkul bhi
samajh Na ho

*APKE HAR KARYA ME SHIKSA HI TO HOTI JISKE SAHARE AAP US KAAM KO SAHI TARIKE SE PURA KARTE HAI*

aapke kamane ka tarika jise aapne SIKH KAR rojgar kiya hai wo bhi SHIKSHA HI HAI

aap ke ache vichar aapke parivar ya aapke guru se mili bhi SHIKSHA hi hai

bhed bakri charane Wala bhi
APNE es KAAM me Pura SHIKSHIT hai

*TO AAP ASHIKSHIT TABHI HAI*

1.JAB AAP KUCH SOCH SAMAJH NAHI SAKTE.

2.AAP KUCH KAAM NAHI KARTE.

3.AAP KUCH SIKHNE YA KISI KO SIKHANE KI KOSHISH NAHI KARTE.

4.KUCH NAYA KARNE KI KOSHISH NAHI KARTE.

5.APNE ALAWA KISI AUR KO KUCH BHI NAHI SAKTE.

WAISE ES MAHAN BHARAT ME TO SHAYAD KOI BHI AISA NAHI HAI
JO KUCH BHI NA KARTA HO

*TO HUM KAH SAKTE HAI KI*

MERE UNNAT BHARAT ME TO SAHYAD HI KOI ASHIKSHIT HOGA?




2/12

shiksa se Matlab
kewal ek  ketabi
GYAN nahi

kai log SHIKSHA
ko kewal
kitab ka
GYAN bolte hai

lekin
HAR wo GYAN
ya HAR wo
KALA jise aap ne
Kisi bhi Karan sikha hai
wo bhi ek shiksa hi hai

aur aapne us se kitna
samjha ya sikha
ye aapke
shiksa ka samarthya hai

eske adhar par
aap khud
apna aanklan
kar sakte hai

kuch Na
pade likhe log
khudko ashikshit
bhi kahte
hai

par ashikshit ka
Matlab kewal anpad
hi nahi hota

Sahi mayno me
agar Mani gayi
bat kahu to
ASHIKSHIT
wahi hai

Jo Dimag se
shunya (0)
ho
  JISME chetna
jaisi bulkul bhi
samajh Na ho

*APKE HAR KARYA ME SHIKSA HI TO HOTI JISKE SAHARE AAP US KAAM KO SAHI TARIKE SE PURA KARTE HAI*

aapke kamane ka tarika jise aapne SIKH KAR rojgar kiya hai wo bhi SHIKSHA HI HAI

aap ke ache vichar aapke parivar ya aapke guru se mili bhi SHIKSHA hi hai

bhed bakri charane Wala bhi
APNE es KAAM me Pura SHIKSHIT hai

*TO AAP ASHIKSHIT TABHI HAI*

1.JAB AAP KUCH SOCH SAMAJH NAHI SAKTE.

2.AAP KUCH KAAM NAHI KARTE.

3.AAP KUCH SIKHNE YA KISI KO SIKHANE KI KOSHISH NAHI KARTE.

4.KUCH NAYA KARNE KI KOSHISH NAHI KARTE.

5.APNE ALAWA KISI AUR KO KUCH BHI NAHI SAKTE.

WAISE ES MAHAN BHARAT ME TO SHAYAD KOI BHI AISA NAHI HAI
JO KUCH BHI NA KARTA HO

*TO HUM KAH SAKTE HAI KI*

MERE UNNAT BHARAT ME TO SAHYAD HI KOI ASHIKSHIT HOGA?


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